पुरी दुनिया की फार्म
कंपनियां कोरोना की खिलाफ़ सटीक दवा की तलास कर रही है. ए किसी युद्ध से कम नहीं है
और इस संघर्ष में भारतीय फार्म कंपनियां काफी आगे है और कई कंपनियों को कोरोना में
इस्तेमाल होने वाली दवाओं को मंजूरी भी मिल गई है.
ये मंजूरी तमाम चेकिंग के
बाद दी गई है. भारतीय फार्म कम्पनी ग्लेनमार्क फार्मसुटिक्लस, सिप्ला और हिटेरो को
ड्रग कंट्रोलर ऑफ़ इंडिया ने रेड मी सिविर और फविपिराविर की जेनेरिक दावा बनाने की
मंजूरी दी है और इन एंटी-वायरल दवाओ से कोरोना मरीजों का इलाज करने में काफी मदद
मिली है.
मुंबई की ग्लेनमार्क फार्मसुटिक्लस
ने फविपिराविर दावा को “फैबीफ्लू” के नाम से उतारा है. और इससे हलके और
माध्यम वर्ग वाले कोरोना मरीजों का इलाज किया जा रहा है. और इस दावा को आपातकालीन
स्थितियों में ही इस्तेमाल करने की मंजूरी दी गई है.
और इसकी कीमत 103रु प्रति
टेबलेट है. डॉक्टर की सलाह पर इसे पहले दिन 1800 mg दिन में दो बार और फिर चौद्वे
दिन तक हर रोज 800 mg दिन में दो बार इस्तेमाल करना होगा. ये दवा जून के अंत तक
उपलब्ध होगी.
वही सिप्ला ने भी
एंटी-वायरल ड्रग रेमदीसिविर की जेनेरिक दवा बनाने की घोषणा की है जिसे आपात
स्थितियों में कोरोना के मरीजों के इलाज के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है व सिप्ला
के दवा का नाम होगा “सिपरेमी” और ये दवा 100 mg के बोतल में मिलेगी. वही
इसकी कीमत 3000 रु से लेकर 4000 रु प्रति डोज़ होगी.
हैदराबाद की कंपनी हेटेरो
की दवा “कोविफॉर” अगले एक हफ्ते में बाज़ार में आ जाएगी. और इसकी कीमत 5000
रु 6000 रु प्रति डोज़ होगी. वही एक कोरोना मरीज को कम से कम इस दवा की 5 से 6 डोज़
की जरुरत होगी. ये दवा वायरस खुद को बढ़ने की क्षमता को रोक देगी. और इस दवा को
किसी डॉक्टर की देख-रेख में ही दिया जा सकता है.
हालाकि कई मेडिकल
एक्सपर्ट्स ने इन दवाओ को लेकर कई चेतावनिया दी है. और इसे कोरोना के खिलाफ़ जादू की
गोली की तरह नहीं देखना चाहिए. वैसे तो ये दवा शरीर में वायरल लोड यानि वायरस के
फलने की गति को रोक सकती है. ये अभी भारत की परिस्थितियों को देखते हुआ एक बहुत
बड़ी मदद हो सकती है क्योकि अभी भारत में करीब कोरोना का ग्राफ अब नए रिकॉर्ड बना
रहा है.
इसका इस्तेमाल करने से पहले
मरीज से एक पहले कंसेंट लैटर भी सिग्नेचर करवाया जायेगा क्योकि अभी तक ये दवाये
फेज-2 के क्लीनिकल ट्राइल में चल रही है. और कई मेडिकल एक्सपर्ट्स अभी भी कह रहे
है की ये दवा एक मात्र रामबाण नहीं है...
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