नई दिल्ली : बलवान घाटी झड़प के बाद चीन से हर तरह
के रिश्ते तोड़ने की बात चल रही है लेकिन इसी बीच सैनिकों को मिलने वाली बुलेट
प्रूफ जैकेट में ही चीनी लिंक मिल गया है जिस पर आप एक विवाद खड़ा हो गया है दरअसल
गृह मंत्रालय जल्द ही सेना के लिए 50000 बुलेट प्रूफ जैकेट की खरीदारी करने वाला है
इन जैकेट का इस्तेमाल आइटीबीपी के जवान भी करेंगे जो लाइन आफ एक्चुअल कंट्रोल यानी
एलएसी पर चीन से देश की रक्षा करते हैं ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जो देश
हमारी सेना को धोखे से मार रहा है उसके यहां की चीजें सेना को देना कितना सही होगा
बुलेट प्रूफ जैकेट को लेकर सरकार असमंजस में है सरकार को सेना के लिए चल बुलेट
प्रूफ जैकेट भी चाहिए और यह भी पता चला है कि वेंडर चीन से माल ले रहा है.
फिलहाल
रक्षा मंत्रालय ने सोचा है कि 180000
ने बुलेट प्रूफ जैकेट जो आर्डर पहले दिया गया था उसे ऐसे ही चलने
दिया जाए समस्या यह है कि 2019 में वेंडर ने अमेरिका और
यूरोप के जैकेट का कॉन्ट्रैक्ट ले लिया बाद में चीन से रो मटेरियल रिपोर्ट करके
तैयार किया ऐसे में इस बात की पूरी संभावना है कि मैं आर्डर में विंटर जैकेट बनाने
के लिए सबसे जरूरी हाई परफॉर्मेंस पॉलिथीन यानी एचपीपीटी रिपोर्ट कर सकता है रक्षा
मंत्रालय चाहता है कि जल्द से जल्द एक लाख 80 हजार बुलेट
प्रूफ जैकेट का ऑर्डर दे दिया जाए बुलेट प्रूफ जैकेट को लेकर इस महीने में तीन
टेंडर आ रहे हैं इनमें से दो आई टी बी पी जवानों के लिए और एक टेंडर सीआरपीएफ के
जवानों के लिए है तीनों टेंडरों को लेकर यह नहीं कहा गया है कि चीन से सामान का
इंपोर्ट नहीं कर सकते इस चीज के लिए फ्री है कि वह रो मटेरियल चीन से मंगाना है या
फिर किसी और देश से एक रिपोर्ट के मुताबिक 2018 में इंडियन
आर्मी में 639 करोड़ के बुलेट प्रूफ जैकेट ऑर्डर दिया गया था
जिसको उसने वेस्टर्न देशों को छोड़कर चीन की कंपनी से इंपोर्ट करना शुरू कर दिया
इंडियन आर्मी की तरफ से जो 639 करोड़ रुपए की जमा किए गए थे
उसका बड़ा हिस्सा चीन की कंपनियों को गया था जिसमें 40 फ़ीसदी
जैकेट मटेरियल का इंपोर्ट चीन से किया गया था सिलेक्शन प्रोसेस के दौरान वेंडर ने
यूरोप और अमेरिका के इंपोर्ट हुए रो मटेरियल से बने जैकेट को दिखाया और
कॉन्ट्रैक्ट मिलने के बाद उसने सप्लायर बदल दिया और चीन से इंपोर्ट करने लगा.
एक
संस्था ने सरकार से अपील की की वह इस मामले में जल्द से जल्द क्लेरिटी लाए उनका
कहना है कि अगर vendor
से चीनी कंपनियों से आयात करेंगे तो बहुत बड़ी मात्रा में विदेशी
मुद्रा चीन की कंपनियों को चली जाएगी


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