दिल्ली हाई कोट द्वारा E-Commerce कंपनियों पर गिरी गाज...


भारत और चीन के बीच सीमा विवाद और 20 सैनिकों की शहादत चीन पर भारी पड़ रही है। भारत ने चीन को चारों खाने चित कर दिया है पहले चीनी सामानों का बहिष्कार किया और उसके बाद उसके डिजिटल एप्स पर इस डिजिटल स्ट्राइक किया। और चीन के व्यापार की कमर तोड़ दी है। हर तरफ चीन और उसके एप्स का विरोध हो रहा है लेकिन ऐसा नहीं है कि चीन का विरोध एप्स बैन तक ही सीमित है।
मामला अब और गंभीर होता जा रहा है जैसा कि हम आपको बता दें की देश के नागरिकों की निशाने में अगला निशाना चीनी प्रोडक्ट भी है और इसी वजह से मेड इन चाइना प्रोडक्ट की पहचान के लिए ई-कॉमर्स कंपनियों पर दबाव बनाने की मुहिम शुरू हो गई है।

इसी बात को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। उस जनहित याचिका में एक वकील ने लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट 2009 को लागू करने और इसके तहत उन सभी नियमों को लागू करने की मांग भी की है। जिनके मुताबिक ई-कॉमर्स वेबसाइट पर बेचे जा रहे सामानों पर 'कंट्री ऑफ ओरिजिन' अथवा उसका ब्यौरा देना जरूरी है। इससे इंडिया में बने प्रोडक्ट को बढ़ावा मिलेगा और उसकी बिक्री बढ़ेगी साथ ही साथ लोग मेड इन चाइना और मेड इन इंडिया प्रोडक्ट्स को आसानी से पहचान पाएंगे।
  
याचिका की सुनवाई के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने ई-कॉमर्स वेबसाइट अमेजॉन फ्लिपकार्ट स्नैपडील समेत तमाम ई-कॉमर्स कंपनियों को नोटिस जारी किया है और कोर्ट ने इसके अलावा Department Of Commerce Ministry Of Commerce And Industry को भी इस मामले में नोटिस भेजा है। 

याचिका कर्ता अमित शुक्ला ने कोट से कहा कि जब हम सीमा पर चीन के आमने-सामने हैं तो ऐसे में अपने देश में बने प्रोडक्ट को बेचने के लिए बढ़ावा दिया जाना चाहिए। ऐसे में जरूरी है कि ई-कॉमर्स कंपनियां अपने वेबसाइट पर बेची जा रही प्रोडक्ट का मेड इन ओरिजिन और उस सामान की पूरी जानकारी दें। और साथ ही साथ यह भी बताएं कि उस सामान का निर्माण किस देश में हुआ है। 

आपको बता दें कि सरकार ने सरकारी E-Market Place-  GeM पर विक्रेताओं के लिए अपने सभी प्रोडक्ट लिस्ट कराते वक्त उन्हें उस प्रोडक्ट का कंट्री ऑफ ओरिजिन की जानकारी देना अनिवार्य है। और साथ ही साथ जिन विक्रेताओं ने जैन पर यह नए नियम लागू होने से पहले अपने प्रोडक्ट लिस्ट किए हैं उन सब को अपने प्रोडक्ट के कंट्री ऑफ ओरिजिन को दुबारा अपडेट करना होगा अन्यथा उनके सामानों को जैन से हटा दिया जाएगा। वही जाने स्थानीय कंटेंट की भागीदारी का संदेश देते हुए भी यह प्रावधान किया है और इसके अलावा पोर्टल पर मेक इन इंडिया का फिल्टर भी लगाया गया है।




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