चीन के खिलाफ भारत का आर्थिक युद्ध! सरकार द्वारा भी शुरु?



हिंदुस्तान ने चीन के खिलाफ आर्थिक जंग छेड़ दिया है। देश की जनता का गुस्सा चीन के सामान के खिलाफ सड़कों पर दिख रहा है और वही सरकार ने भी अपने स्तर पर चीन को झटका देने की तैयारी कर ली है।

दुनिया में आर्थिक शक्ति बनने का सपना चीन का सपना भारत के बगैर अधूरा है लेकिन चालबाज चीन की फितरत ऐसी है कि जिस थाली में खाते हैं उसी थाली में छेद करता है।

ऐसा करने पर भारत ने चीन की उस थाली को छीनने का फैसला कर लिया है। सरकार एक के बाद एक चीन को आर्थिक झटके दे रही है आपको चीन के बहिष्कार की पूरी डिटेल में बताते हैं कि केंद्र और राज्य सरकार कहां-कहां और किस-किस मोर्चे पर सबक सिखा रही है।

एमटीएनएल बीएसएनएल ने अपने 4G नेटवर्क के लिए चीनी कल पुर्जों उपकरणों का इस्तेमाल नहीं करने का फैसला लिया है।

वहीं भारतीय रेलवे में 471 करोड रुपए का सिगनलिंग प्रोजेक्ट रद्द कर दिया है।

एमएमआरडीए ने मोनोरेल से जुड़ी चीन की दो कंपनियों का टेंडर रद्द कर दिया है।

एमएमआरडीए ने 10 मोनो रेल रेक्स बनाने की गोली भी रद्द कर दी है।

मेरठ रैपिड रेल का टेंडर चीनी कंपनी के पास था उसे भी रद्द कर दिया गया है।

महाराज सरकार ने तलेगांव में ग्रेट वॉल का टेंडर भी रद्द कर दिया।

महाराष्ट्र सरकार ने पीएमआई इलेक्ट्रो मोबिलिटी और हेंगली इंग का टेंडर भी रद्द कर दिया है।

हरियाणा सरकार ने चीनी कंपनियों का 780 करोड़ का ऑर्डर रद्द कर दिया है वही हरियाणा सरकार ने हिसार और यमुनानगर में चीनी कंपनियों का टेंडर रद्द किया।

वही योगी सरकार ने तय किया है कि एनर्जी सेक्टर में चीनी उपकरणों के इस्तेमाल पर रोक जल्द लगाई जाएगी। यूपी सरकार ने तय किया है कि सुबे में चीनी बिजली के मीटर के इस्तेमाल पर रोक लगाएगी।

दिल्ली होटल एसोसिएशन ने तय किया है कि होटलों में चीनी नागरिकों को कमरा नहीं दिया जाएगा। वही बोधगया होटल एसोसिएशन मैं भी चीनी पर्यटकों का बहिष्कार किया है। 

गलवान में हमले के बाद देश में चीन के सामानों के बहिष्कार की हुई तेज हो रही है। फिल्म स्टार से लेकर नेता तक चीन के सामान का इस्तेमाल ना करने का अपील कर रहे हैं। 

आइए हम आपको बताते है फिल्म अभिनेत्री कंगना राणावत द्वारा दिया गया स्टेटमेंट...
उन्होंने कहा कि हम सबको इसमें हिस्सा नहीं लेना चाहिए की इसमें जितने भी चाइनीस गुड्स है और प्रोडक्ट है और जिन भी कंपनियों में उन्होंने इन्वेस्ट किया है उनसे उनको रिटर्न्स मिलता है रेवेन्यू जाता है और हम सबको मिलकर उन सभी कंपनियों ऑर्गेनाइजेशन ओं प्रोडक्ट्स का बहिष्कार करना होगा ताकि वह उस संपत्ति यानी जो इंडिया से कट्टी होकर जाती है उस संपत्ति से हथियार खरीद कर हमारे सैनिकों के सीने छलनी करते हैं तो क्या हम इस युद्ध में चाइना का साथ दे सकते हैं उन्होंने कहा कि हमारा कर्तव्य बनता है कि हम अपनी सेना और सरकार का साथ दें उन्होंने यह भी कहा कि हम प्रतिज्ञा लेते हैं कि हम आत्मनिर्भर बनेंगे और चाइनीस गुड्स को बिल्कुल बॉयकॉट करेंगे।

अब आप ही अंदाजा लगा सकते हैं कि भारत के साथ यह आर्थिक लड़ाई चीन को कितना दर्द दे सकती है। चीन से भारत जो सामान आयात करता है उसमें सबसे ज्यादा इलेक्ट्रिक सामान है। हम चीन से करीब 34% इलेक्ट्रिक सामान मंगाते हैं। उसके अलावा न्यूक्लियर रिएक्टर ऑफ मशीनरी चीन से मनाई जाती है यह करीब 18 फ़ीसदी है। चीन से हम करीब 10% ऑर्गेनिक केमिकल का आयात करते हैं। करीब 6 फ़ीसदी सोने जेवरात का आयात करते हैं। लोहा और इस्पात का आयात करीब 4 फ़ीसदी करते हैं। वही 4 फ़ीसदी प्लास्टिक का याद करते हैं। 






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