चीन ने अब रूस के एक महत्वपूर्ण शहर पर ठोका अपना दावा!

नई दिल्ली : वैसे तो चीन के 14-15 पड़ोसी देश हैं, लेकिन उसका सभी के साथ बॉर्डर विवाद चलता ही रहता है। शिवाय रूस के, लेकिन कल चीन ने रूस से इस मामले में भी बगावत ले ली है।



आपको बता दें कि चीन ने रूस के एक बहुत बड़े शहर पर अपना दावा ठोका है। अगर आप भारतीय को देखें तो चीन भारत के रीजन इलाके पर दावा कर रहा है तो भारतीयों का खून इतना खोल रहा है। 

लेकिन चीन ने तो रूस के एक बहुत ही बड़े स्टैटिक महत्वपूर्ण शहर व्लादिवोस्तोक पर दावा ठोका है। और हम आपको बता दें कि इसके लिकेशन चीनी को तो झेलना ही पड़ेगा और यह प्लीकेशन रूस द्वारा शुरू भी कर दिया गया है। 




जैसे ही चीन के तरफ से इस तरह का दावा आना शुरू हुआ तभी प्रधानमंत्री मोदी ने रूसी राष्ट्रपति पुतिन रात को फोन पर बात की है। यानी कि रूस और भारत से एक समय पर दुश्मनी मोल लेना चीन के लिए बहुत भारी पड़ने वाला है। 

आइए हम बताते हैं कि व्लादिवोस्तोक रूस के लिए कितना महत्वपूर्ण है...
दरअसल इसके तो महत्वपूर्ण कारण है!

पहला कारण: रूस का यहां पर बहुत बड़ा नेवल देश है जिसकी वजह से हो प्रशांत महासागर में यूएस नौसेना को आसानी से निकल कर पाता है।

दूसरा कारण: दरअसल रूस के पास आज की तारीख में 50 से ज्यादा नेवल पोर्ट हैं। जिनमे से दो ही ऐसे हैं जो हमेशा खुले रहते हैं एक सेवास्तोपोल पोर्ट और दूसरा व्लादिवोस्तोक पोर्ट, यह दोनों सर्दियों में भी लंबे समय तक खुले रहते हैं और इसके अलावा सभी जम जाते हैं। जिसकी वजह से आप यह कह सकते हैं कि रूस लैंडलॉक कंट्री बनकर रह जाता है। और अब तो आप समझ ही गए होंगे कि रूस इस चीनी दावा को बर्दाश्त नहीं करेगा। यह भी हो सकता है कि चीन को इस पर भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।

अब बात कर लेते हैं कि चीन ने ऐसा कदम आखिर उठाया ही क्यों। दरअसल पिछले हफ्ते खबर निकल कर आ रही थी कि रूस ने अपने एक बड़े वैज्ञानिक और पूर्व नौ सैनिक कमांडर को गिरफ्तार किया है। उन पर आरोप था कि उन्होंने चीन के लिए, रूस द्वारा बनाए जा रहे हैं बहुत ही सीक्रेट पनडुब्बी के टेक्निकल स्पेसिफिकेशन को चुरा कर चीन को सप्लाई किया है। और इसके बाद चीन ने इस आरोप के बदले रीटेलिएट किया है। और यह उन्होंने अपने बहुत बड़े मीडिया ग्रुप सीजीटीएन के थ्रू करवाया है। दरअसल अभी चीनी मीडिया को इसलिए सीरियस लिया जा रहा है क्योंकि जो चीनी मीडिया कह रही है वह चीन की कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा करवाया जा रहा है। 

हमेशा चीन का मुखपत्र और पॉलिसी उनके चीनी मीडिया द्वारा ही दिखाई देता है। जो नोबेल टाइम्स अखबार और ट्विटर के जरिए करता है वही CGTN Network, TV channel चलाकर करता है। CGTN Network  के एक बहुत बड़े संपादक ने अपने वेरीफाई टि्वटर अकाउंट से यह दावा किया है। वैसे तो माना जा रहा है कि यह दावा सीधे तौर पर कम्युनिस्ट पार्टी का ही होगा। और वहां कि सोशल मीडिया पर भी इस तरह की बातें शुरू हो गई है कि मिंग साम्राज्य के समय में व्लादिवोस्तोक हमारा था और उसे चीन को वापस लेना चाहिए। यानी आप वहां पर चीन में रूस के खिलाफ एंटी रूस प्रोपेगेंडा चलाया जा रहा है। इसी बात को लेकर चिंतित है क्योंकि उसे पता है कि अमेरिका उसका साथ नहीं देगा और भारत का चीन के साथ अभी कुछ ना कुछ डामाडोल चल रहा है। 

लेकिन आपको बता दें कि इससे भारत को बहुत ज्यादा फायदा होने वाला है और अब भारत, रूस और चीन को दूर रखने में आसानी होगी। अगर जब भारत और चीन के बीच में कोई भी कॉन्सेप होता है तो हम दोनों से दूर हैं लेकिन अभी रूस को पैसों की जरूरत है और इसी बात को ध्यान में रखते हुए रूस चीन को पीछे से हथियार सप्लाई कर सकता था। और यही भारत के लिए बड़ा इश्यू बन सकता था। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा अकेला बढ़ता जा रहा है और शायद जी के साथ ना जाए। अगर इस तरह की बयानबाजी चीन की तरफ से आती रही तो आपको रूस और चीन के बीच में दूरियां लंबे समय तक देखने को मिल सकता है और यह भारत के लिए एक अच्छी खबर है।







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