अमेरिका ने किया चीन के जड़ पर सीधा प्रहार! इससे भारत को होगा बेहत फायेदा...


अगर आप नीचे दी गई इमेज पर नजर डालेंगे तो आप देखेंगे कि दुनिया के टॉप टेन बैंकों में से टॉप 4 बैंक चाइना के हैं।



और यही है चीन की जड़ और उसकी रीढ़ की हड्डी और इसी ही तोड़ने का प्रोग्राम अमेरिका ने कल ही संसद में शुरू कर दिया है उन्होंने एक बहुत ही खास बिल पेश किया है जिससे कि चीन कमजोर नसों और दिया जाएगा।


हम आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चीन जब भी मुसीबत में बसता है और उसकी अर्थव्यवस्था उनके यह बैंक ही अहम भूमिका निभाते हैं। आपको बता दें कि जब भी ची न को उसकी अर्थव्यवस्था में तेचीन लानी होती है तो यह बैंक ही सबसे अहम भूमिका निभाते हैं। 

हम आपको बताते हैं कि चीन के महा बैंकर्स चीन की अर्थव्यवस्था को संभालने रखने में कैसे हम भूमिका निभाते हैं।

पहला उदाहरण :
चीन जब भी अर्थव्यवस्था में बूस्ट लाना चाहता है तब वह बैंकों को डायरेक्शन देता है कि वह चीनी रियल एस्टेट कंपनीज को बहुत तेचीन से मोटे मोटे लोन कम ब्याज दर पर दें और साथ ही साथ वहां के लोगों को भी कहता है कि वह कम ब्याज दर पर लोन ले और चीनी रियल स्टेट कंपनी द्वारा खड़ी की गई बड़ी-बड़ी रेजिडेंशियल इमारतों को खरीदें। इससे चीन की अर्थव्यवस्था को बूस्ट मिलता है और अर्थव्यवस्था की रफ्तार तेज हो जाती है।

दूसरा उदाहरण :
यह अपने बैंकों के द्वारा अपनी मुद्रा की वैल्यू को डॉलर के मुकाबले करवाते रहते हैं जिससे चीनी एक्सपोर्टर को अधिक से अधिक मोटा मुनाफा हो पाए और उन्हें दूसरे मार्केट में कंपटीशन भी कम मिलता है इस तरह उनके उत्पाद भी सस्ते हो जाते हैं।

तीसरा उदाहरण :
यह उदाहरण फॉरेन पॉलिसी से रिलेटेड है। इन्हीं बैंकों के द्वारा विदेशों में पैसा निवेश करता है और कई देशों को फंसा ता है जैसे पाकिस्तान को फंसा है जांबिया आदि देश शामिल है। और वहां पर उनसे अपना मिलिट्री बेस बनवा लिया।

आपको बता दें कि फिलहाल किस के लिए अब वह बांग्लादेश और नेपाल को भी फसा रहे हैं और भारत को इससे सतर्क रहना होगा।
और अब अमेरिका ने चीन के इस हथियार पर ही प्रहार करने का प्लान तैयार किया है। अमेरिका ने सीधे हुकुम पर धावा बोला है जिसका नाम हमको ऑटोनॉमी है। उन्होंने कहा है कि हांगकांग की जो भी कोई बैंक या नागरिक उसकी ऑटोनॉमी को खत्म करना चाहता है या भूमिका अदा करेगा उसके खिलाफ हम प्रतिबंध लगाएंगे मतलब सीधे चीनी चीनी बैंकों को चेतावनी दे दी गई है। इस बार किसी बहाने से उसने चीनी बैंकों को टारगेट बनाया है। हम आपको बता दें कि इससे चीनी बैंक कमजोर होंगे। 

उदाहरण के तौर पर हम बता दें कि लॉकडाउन के वक्त एक चीनी ही बैंक ने भारत के प्राइवेट सेक्टर के सबसे बड़े बैंक एचडीएफसी में चुपके से एक परसेंट स्टेट खरीद लिया था अगर भारत ने सख्त कदम निवेशकों के लिए नहीं उठाया होता तो शायद चुपचाप पूरा बैंक ही खरीद लेता।






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