चीनी नौसेना के सामने दक्षिण चीन सागर मे अमेरिकी नौसैना का शक्ति प्रदर्शन, देखते रह गई चीनी नौसेना...



चीनी नौसेना दक्षिण चीन सागर के एक खास हिस्से में अपने कुछ आइलैंड के पास युद्ध अभ्यास कर रही थी। यह युद्धाभ्यास वहां पर पिछले 7 दिनों से चल रहा था। लेकिन अमेरिका ने कुछ और करने की ठानी थी और अमेरिका अपने दो एयरक्राफ्ट कैरियर को लेकर उन्हीं आईलैंड के पास पहुंच गया है। और चीनी नौसेना के सामने अपना युद्ध अभ्यास शुरू कर दिया। 

आप समझ सकते हैं कि अमेरिका ने और अमेरिकी नौसेना ने चीनी नौसेना सेना की किस तरह बेज्जती की। वहां पर अमेरिकी नौसेना ने युद्ध अभ्यास करना शुरू कर दिया और चीनी नौसेना खड़ी की खड़ी देखती रह गई। उनके घर में घुसकर उनके सागर में घुसकर कोई और देश की नौ सेना युद्ध अभ्यास कर रही है और चीनी नौसेना कुछ नहीं कर पा रही है। 

ऐसी बात नहीं है कि वहां पर केवल चीन के नौसैनिक ही थे। बल्कि वहां पर चीन के पास destroyer और corbett's व उनकी अन्य जहाजे भी मौजूद थी। लेकिन वहां पर अमेरिका ने रत्ती भर समय में सबका तमाशा बना कर रख दिया। और अब पूरी दुनिया में इस तरह दिखाया जा रहा है कि अमेरिकी नौसेना ने किस तरह चीनी नौसेना को हयूमुलेट किया है। और साथ ही साथ पूरी दुनिया में चीन की कमजोरियों को जगजाहिर कर दिया है। 

अब कुछ चाइनीस ट्विटर हैंडल जैसे ग्लोबल टाइम्स, सीजीटीएन नेटवर्क और चीनी मीडिया हाउसेस कह रहे हैं, कि अमेरिकी नौसेना कैसे हमारी सीमा में घुस आए हैं। जबकि पूरा दक्षिण चीन सागर हमारा है। लेकिन इससे अब कुछ होने वाला नहीं है अमेरिका जो करना चाहता था और पूरी दुनिया को दिखाना चाहता था वह कर चुका है। 

हम आपको बता दें कि इससे केवल भारत ही नहीं बल्कि ताइवान को भी फायदा हुआ है। क्योंकि चीन का भारत और ताइवान दोनों के खिलाफ काफी अग्रेसन चल रहा था। 
जिस तरह अमेरिका अभी चीन के घर में घुसा है उस हिसाब से चीन को पता चल चुका है कि अगर उसने भारत की तरफ कुछ भी करने की कोशिश की तो उधर से अमेरिका सख्त कदम उठाएगा। और इसकी गारंटी भारत को एक पत्र के जरिए मिल गई है।

दूसरी बड़ी अपडेट निकल कर आ रही है कि अमेरिका के बहुत वरिष्ठ और बहुत ही सीनियर सांसद, ने भारत को एक चिट्ठी लिखी है। सूत्रों के हवाले से पता चलने के बाद यह बताया जा रहा है कि उस चिट्ठी में अमेरिकी सीनियर सांसद मैं यह लिखा होगा कि आपने जो एक्शन चीनी एप्स को बैन करके, चीन के खिलाफ लिया था, वह बहुत ही सराहनीय है। और उन्होंने साथ में यह भी कहा कि अमेरिका भी इस तरह की कुछ बड़ी कार्यवाही जल्द ही करने वाला है। उन्होंने कहा कि हम आपको फॉलो करेंगे क्योंकि आप बहुत ही जबरदस्त चीन के खिलाफ कार्यवाही कर रहे हैं और हम सब आपके साथ हैं, हर कदम कदम पर। 

इसका सार बताएं तो अगर भारत को कभी कोई हथियार चाहिए, तो केवल अमेरिकी राष्ट्रपति ही नहीं बल्कि अमेरिकी राष्ट्रपति को अपने सीनियर सांसदों पर भी निर्भर रहना पड़ता है। और जब वहां के सीनियर सांसद इस तरह की बयानबाजी करते हैं, तो समझ लीजिए की हथियारों की सौदेबाजी और खरीद में रास्ता साफ होता नजर आ रहा है। और यह भारत के लिए बूस्टर का काम करेगा। आप तो जानते ही होंगे कि चीनी नौसेना के कुछ जहाज पनडुब्बी भारतीय हिंद महासागर में कभी-कभी घूमते रहते हैं तो क्या भारतीय नौसेना को भी ऐसा कुछ एक्शन लेना चाहिए कमेंट करके अपनी राय दीजिए।





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