भारत बुधवार को 8वीं बार का अस्थाई मेम्बर चुन लिया गया है। हिंदुस्तान साल 2021-22 के बीच सुरक्षा परिषद के अस्थायी मेम्बर के तौर पर उपस्थित रहेगा। इसके पहले 1950-51, 1967-68, 1972-73, 1977-78, 1984-85, 1991-92 व 2011-12 में हिंदुस्तान यह जिम्मेदारी निभा चुका है।
सुरक्षा परिषद में मौजूदगी से किसी भी देश का यूएन प्रणाली में दखल व दबदबे का दायरा बढ़ जाता है। ऐसे में 8 वर्ष बाद हिंदुस्तान का सुरक्षा परिषद में पहुंचना बहुत ज्यादा अहम है।
हालांकि पाक इससे बेहद परेशान है। पाक ने बोला है कि भारत का संयुक्त राष्ट्र संघ में सुरक्षा परिषद का अस्थाई मेम्बर चुना जाना एक चिंता का विषय है। पाक के विदेश मंत्री शाह मोहम्मद कुरैशी ने बोला है कि हिंदुस्तान का सुरक्षा परिषद में अस्थाई रूप से शामिल होना कोई बड़ी बात नहीं है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है। लेकिन हमारे लिए यह निश्चित तौर पर एक चिंता का विषय है।
पंद्रह देश हैं सुरक्षा परिषद में
संयुक्त राष्ट्र का सबसे अहम अंग है संयुक्त सुरक्षा परिषद जो कि सारे दुनिया में शक्ति संतुलन बनाकर रखता है। इस सुरक्षा परिषद में कुल 15 देश शामिल हैं जिनमें से पांच राष्ट्रों को स्थायी सदस्य्ता प्राप्त है। इन राष्ट्रों में अमेरिका, रूस, फ्रांस, ब्रिटेन व चाइना हैं। इसके अलावा दस अन्य राष्ट्रों को सुरक्षा परिषद की अस्थाई सदस्यता प्राप्त है व इन्हीं राष्ट्रों के साथ अब हिंदुस्तान भी सुरक्षा परिषद का भाग बन गया है।
संयुक्त राष्ट्र का सबसे अहम अंग है संयुक्त सुरक्षा परिषद जो कि सारे दुनिया में शक्ति संतुलन बनाकर रखता है। इस सुरक्षा परिषद में कुल 15 देश शामिल हैं जिनमें से पांच राष्ट्रों को स्थायी सदस्य्ता प्राप्त है। इन राष्ट्रों में अमेरिका, रूस, फ्रांस, ब्रिटेन व चाइना हैं। इसके अलावा दस अन्य राष्ट्रों को सुरक्षा परिषद की अस्थाई सदस्यता प्राप्त है व इन्हीं राष्ट्रों के साथ अब हिंदुस्तान भी सुरक्षा परिषद का भाग बन गया है।
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